गुरुवार, 23 जनवरी 2020

स्याह परतों के नीचे :





स्याह परतों के नीचे, सत्य कब तक छुपेगा?
धूल हिय से हटा , सबकुछ निर्मल दिखेगा!!

दीपक हमारा बुझाकर न सोचो ,
तुम्हारा मकां ज्यादा रोशन दिखेगा!!

लड़खड़ाते हुओं को उठाकर दिखाओ,
उनके आशीष से दिन तुम्हारा बनेगा!!

पंथ में तुम किसी के न कंटक बिछाओ,
चले उस पंथ तुम जो, तुम्हें वह चुभेगा!!

द्वेष के भावों से कुछ न हासिल  'सखे',
रखें सद्भाव  मन  में तो जीवन खिलेगा!!

फेंक कर कीच सूरज पे भ्रम में न रहना,
अब न चमकेगा व‍ह, न दोबारा उगेगा!!

दिखे गर जो खा़मी , दिखा दें हमें,
सुधरने का हमको भी अवसर मिलेगा!!


सुधा सिंह व्याघ्र ✍️


11 टिप्‍पणियां:

  1. वाह बहुत सुंदर और सार्थक सृजन सुधा जी 👌👌

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  2. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (25-01-2020) को "बेटियों एक प्रति संवेदनशील बने समाज" (चर्चा अंक - 3591) पर भी होगी
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का
    महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    ….
    अनीता सैनी

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति,सुधा दी।

    जवाब देंहटाएं
  4. सुंदर स्त्री और सार्थक सृजन सुधा जी।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. धन्‍यवाद दी, आप बहुत दिनों बाद आईं, अच्छा लगा

      हटाएं
  5. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  6. वाह!!

    दीपक हमारा बुझाकर न सोचो
    तुम्हारा मकां रौशन दिखेगा

    वाह!! लाजवाब पँक्ति ������

    जवाब देंहटाएं

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