बुधवार, 8 जनवरी 2020

सुधा की कुंडलियाँ-5


सुधा की कुंडलियाँ

21:कुनबा
छोटा कुनबा है सही, खुश रहते सब लोग।
हृदय में कटुता न रहे,बढ़े प्रेम का योग।।

बढ़े प्रेम का योग, नहीं छल बल से नाता।
इक दूजे के *साथ ,साथ* हर एक निभाता।।
कहे सुधा ललकार,*कथन यह लगे न खोटा।*
रखो याद यह बात,रहे नित कुनबा छोटा।।



 22:पीहर
बेटी तेरी बावरी,  डूबी पीहर याद।
भुला सकूँ तुमको नहीं ,बाबुल प्रेम अगाध।।

बाबुल प्रेम अगाध,नहीं सजना घर जाना।
रहती सखियाँ संग,याद है धूम मचाना।।
कहे सुधा सुन आलि, मायका सुख  की पेटी।
समझो हिय के भाव, विदा तुम करो न बेटी।।


23:पनघट
पनघट  हुआ उदास है, पनिहारिन  किस देश।
नीरवता है छा गई,मन को पहुँचे ठेस।।

मन को पहुँचे ठेस, भाव ये किसे सुनाऊँ।
मैं उजड़ा वीरान,किसी के काम न आऊँ।।
दुखी सुधा है आज, हुए सोते अब मरघट।
संस्कृति है शोकार्त्त,अद्य निराश है पनघट।।


24:सैनिक
सैनिक सीमा पर खड़ा ,सजग रहे दिन रात।
देश प्रेम सब कुछ अहो ,मात पिता अरु भ्रात।।

मात पिता अरु भ्रात, घाम अति सहता सरदी।
तन पर झेले घात, बदन पर पहने वरदी ।।
करती सुधा प्रणाम, कर्म उनका यह दैनिक।
साहस का प्रतिरूप,त्याग दे जीवन सैनिक।।

25:कोयल
कूजति कोयल  बाग में,सुन मनवा हरषाय।
स्वागत में मधुमास के,कली कली मुसकाय।।

कली कली मुसकाय,दिवस बासंती आए।
हर्षित बालक वृद्ध,राग बासंती गाएँ।।
प्यारा यह मधुमास,छटा की रहे न अनुमिति।
देख प्रकृति का रूप,बाग में कोयल कूजति।।








8 टिप्‍पणियां:

  1. नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में गुरुवार 09 जनवरी 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
    1937...क्योंकि लगी आग में झुलसा अपने घर का कोई नहीं होता है...



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  2. जी नमस्ते,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (10-01-2019 ) को "विश्व हिन्दी दिवस की शुभकामनाएँ" (चर्चा अंक - 3576) पर भी होगी

    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का

    महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।

    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।

    आप भी सादर आमंत्रित है 
    अनीता लागुरी"अनु"

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  3. एक से बढ़कर यह लाज़बाब कुड़लियाँ ,सादर नमन सुधा जी

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