बुधवार, 15 अप्रैल 2020

दाग कोरोना काल का..

.

# दाग कोरोना काल का

किसी ने कहा था कि
दाग अच्छे हैं!!!
हाँ दाग अच्छे  हैं...
पर तब तक
कि जब तक
जड़ न हो जाएँ..
हमेशा के लिए
किसी रंग को,
बदरंग न कर जाएँ...
किसी के जीवन में
झंझा न भर जाएँ
किन्तु जीव की जीवटता
के आगे किसी का
अस्तित्व कहाँ टीक सका है!!
यह तो अनवरत
प्राकृतिक प्रक्रिया है
इसे चलना है...
जो आया है, उसे जाना है।
ये लिजलिजाता, बदनुमा, भद्दा दाग
जो अद्य सबको अपने पंजों में
जकड़ने को आतुर है
व‍ह भी कब तक
किसी को छका पाएगा
उसे भी तो
जाना ही पड़ेगा।
बस इंतजार है..
तो उस 'सर्फ एक्सेल' का
जो पड़ोसी के दिए
इस भद्दे, विद्रूप दाग का
चिर नाश करेगा
और हम फिर से
आजादी की हवा में
मुक्त साँस ले सकेंगे..

बिना य़ह भूले कि,
"कुछ पड़ोसियों के दाग,
बिलकुल भी अच्छे नहीं होते। "

~सुधा सिंह 'व्याघ्र' 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

पाठक की टिप्पणियाँ किसी भी रचनाकार के लिए पोषक तत्व के समान होती हैं ।अतः आपसे अनुरोध है कि अपनी बहुमूल्य टिप्पणियों द्वारा मेरा मार्गदर्शन करें।☝️👇